Dettagli del libro
Formato
Kindle
Pagine
1,731
Lingua
Hindi
Pubblicato
Nov 26, 2015
Editore
Sai ePublications & Sai Shop
ISBN-10
161813213X
ISBN-13
9781618132130
Descrizione
वर्णानामर्थसंघानां रसानां छंदसामपि।मंगलानां च कर्त्तारौ वंदे वाणीविनायकौ॥ 1॥अक्षरों, अर्थ समूहों, रसों, छंदों और मंगलों की कर्त्री सरस्वती और गणेश की मैं वंदना करता हूँ॥ 1॥भवानीशंकरौ वंदे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ।याभ्यां विना न पश्यंति सिद्धाः स्वांत:स्थमीश्वरम्॥ 2॥श्रद्धा और विश्वास के स्वरूप पार्वती और शंकर की मैं वंदना करता हूँ, जिनके बिना सिद्धजन अपने अंत:करण में स्थित ईश्वर को नहीं देख सकते॥ 2॥वंदे बोधमयं नित्यं गुरुं शंकररूपिणम्।यमाश्रितो हि वक्रोऽपि चंद्र: सर्वत्र वंद्यते॥ 3॥ज्ञानमय, नित्य, शंकररूपी गुरु की मैं वंदना करता हूँ, जिनके आश्रित होने से ही टेढ़ा चंद्रमा भी सर्वत्र होता है॥ 3॥सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ।वंदे व
Generi
Poesia