जुर्रत

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Hindi · Paperback
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Description

जब रक्षक ही भक्षक बने हों तो किसी की पेश नहीं चलती । जिसकी पीठ पर खुद पुलिस हो, उसे झूठा करार देना कोई मजाक नहीं होता । जीत सिंह जैसा कोई शख्स कोई ऐसी बात जुबान पर लाता तो पुलिस लाश का भी पता न लगने देती ।

Book Details

Format Paperback
Pages 448 pages
Language Hindi
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