Description
लल्लू उर्फ लालचन्द हजारे ने जब दो कड़क मवालियों की शागिर्दी पकड़ी थी तो उसे अपना भविष्य बहुत स्वर्णिम और उज्जवल लगता था । वो अनायास ही अमीर बनने, दौलत के पहाड़ पर बैठने के सपने देखने लगा था । काश कि वो जानता कि अपराध कागज की नाव की तरह होता है जो बहुत देर तक, बहुत दूर तक नहीं चल सकती ।
Book Details
Format
Paperback
Language
Hindi