Description
डॉक्टर सिंगला की कहानी उनके कठिन चयन पर आधारित है, जहाँ तरक्की और उसके परिणामों के बीच चलने वाला संघर्ष प्रमुख रूप से चित्रित किया गया है। यह एक ऐसा रास्ता है, जिसमें सफलता के विभिन्न रंग हैं, लेकिन साथ ही एक डोरी भी है जो उन्हें सीमित करती है। जीवन की जटिलताओं ने उन्हें इस मकड़जाल में फंसा दिया है, और उन्हें खुद को पहचानने की जरूरत है।
निर्माण और ध्वंस के बीच संतुलन साधते हुए, डॉक्टर सिंगला को अपने दृष्टिकोण को बदलना होगा। क्या वे इस जाल से बाहर निकल पाएंगे, या यह शहर की चमक-दमक उन्हें और अधिक उलझाएगी? पाठक उनकी यात्रा में लगातार साथ देंगे, जहाँ हर मोड़ पर सवाल उठते हैं, और हर उत्तर में नई चुनौतियाँ छिपी होती हैं।
निर्माण और ध्वंस के बीच संतुलन साधते हुए, डॉक्टर सिंगला को अपने दृष्टिकोण को बदलना होगा। क्या वे इस जाल से बाहर निकल पाएंगे, या यह शहर की चमक-दमक उन्हें और अधिक उलझाएगी? पाठक उनकी यात्रा में लगातार साथ देंगे, जहाँ हर मोड़ पर सवाल उठते हैं, और हर उत्तर में नई चुनौतियाँ छिपी होती हैं।
Book Details
Format
Paperback
Pages
368 pages
Language
Hindi
Published
May 1, 2007
Publisher
Raja Pocket Books
Editions
3 editions
ISBN-10
9380871104
ISBN-13
9789380871103