Book Details
Format
Paperback
Language
Hindi
Published
Jan 1, 2012
Publisher
vani prakashan
ISBN-10
9350722348
ISBN-13
9789350722343
Description
यह पुस्तक एक गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है कि कैसे मीडिया ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की भूमिका को समझा है और उसके आलोक में समाज की वास्तविकताएं कैसे प्रभावित हो रही हैं। लेखक विनीट कुमार ने इस विषय पर गहरी सोच और अध्ययन के माध्यम से दर्शकों के सामने कुछ ऐसे पहलुओं को उजागर किया है, जो अक्सर अनदेखे रह जाते हैं।
पुस्तक पाठकों को मीडिया की जटिलताओं और इसके प्रभावों का सचेत अनुसंधान करने के लिए प्रेरित करती है। ये न केवल पत्रकारिता के सिद्धांतों की आलोचना करती है, बल्कि यह दर्शाती है कि मीडिया की भूमिका कैसे विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक शक्तियों द्वारा आकारित हो रही है। यह उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण पढ़ाई है, जो मीडिया के प्रभाव को समझना चाहते हैं और इसके द्वारा समाज में निर्मित हो रहे धारणाओं और विचारों को चुनौती देना चाहते हैं।
पुस्तक पाठकों को मीडिया की जटिलताओं और इसके प्रभावों का सचेत अनुसंधान करने के लिए प्रेरित करती है। ये न केवल पत्रकारिता के सिद्धांतों की आलोचना करती है, बल्कि यह दर्शाती है कि मीडिया की भूमिका कैसे विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक शक्तियों द्वारा आकारित हो रही है। यह उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण पढ़ाई है, जो मीडिया के प्रभाव को समझना चाहते हैं और इसके द्वारा समाज में निर्मित हो रहे धारणाओं और विचारों को चुनौती देना चाहते हैं।