Description
होतचंदानी ने एक नई जिंदगी बसाने एक लिये नेपाल को छोड़ने का निर्णय कर लिया था । लेकिन वो नहीं जानता था कि उसका दाना-पानी नेपाल से ही नहीं बल्कि इस फानी दुनिया से उठ चुका था । उसकी जिंदगी के पीछे एक नहीं दो नहीं, पूरे पांच पापी पड़े थे ।
Book Details
Format
Paperback
Pages
200 pages
Language
Hindi
Published
May 1, 1989
Publisher
Diamond Pocket Books