पांच पापी

पांच पापी

No ratings yet
1989 · Hindi · Paperback
Add To Shelf

Rate this book


Export Book Journal

Description

होतचंदानी ने एक नई जिंदगी बसाने एक लिये नेपाल को छोड़ने का निर्णय कर लिया था । लेकिन वो नहीं जानता था कि उसका दाना-पानी नेपाल से ही नहीं बल्कि इस फानी दुनिया से उठ चुका था । उसकी जिंदगी के पीछे एक नहीं दो नहीं, पूरे पांच पापी पड़े थे ।

Book Details

Format Paperback
Pages 200 pages
Language Hindi
Published May 1, 1989
Publisher Diamond Pocket Books
Add To Shelf

Rate this book


Export Book Journal